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400 से अधिक मंडियों में होगी धान सहित अन्य खरीफ फसलों की खरीद, 55 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य 

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Procurement of crops at the Minimum Support Price (MSP) announced by the Government of India

Page Media: – हरियाणा में धान की खरीद एक अक्तूबर से शुरू होगी, जो 15 नवंबर, 2022 तक जारी रहेगी। प्रदेश में लगभग 400 से अधिक मण्डियों में खरीफ फसलों की खरीद के लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। इस बार सरकार ने 55 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद का लक्ष्य रखा है। 

100 रुपये प्रति क्विंटल फीस लगेगी

राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि जो धान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर नहीं खरीदा जाता, जैसे बासमती व डुप्लीकेट बासमती, उस पर 4 प्रतिशत मार्केट फीस की जगह अब सीधा 100 रुपये प्रति क्विंटल फीस लगेगी, जिसमें से 50 रुपये मंडी बोर्ड को जाएंगे और 50 रुपये हरियाणा ग्रामीण विकास फंड में उपकर के रूप में जमा होंगे। इसके अलावा, सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि एमएसपी पर खरीद हेतू जिन क्षेत्रों में धान की अच्छी पैदावार होती है, उन क्षेत्रों में औसत पैदावार 30 क्विंटल प्रति एकड़ व अन्य क्षेत्रों में 28 क्विंटल प्रति एकड़ मानी जाएगी। 

खरीफ फसलों की खरीद भी एक अक्टूबर से

राज्य सरकार की घोषणा अनुसार अन्य खरीफ फसलों की खरीद भी एक अक्टूबर से प्रारंभ होगी। फसलों की सुगम खरीद के लिए समुचित व्यवस्था की गई है। किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। विपणन सत्र 2022-23 के दौरान धान, बाजरा, मक्का, मूंग, सूरजमुखी, मूंगफली, तिल, अरहर और उड़द आदि फसलों की खरीद की जाएगी। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा धान की 50 प्रतिशत खरीद की जाएगी। इसके अलावा, हैफेड द्वारा 30 प्रतिशत, हरियाणा राज्य भंडारण निगम द्वारा 15 प्रतिशत तथा भारतीय खाद्य निगम द्वारा 5 प्रतिशत धान की खरीद की जाएगी। 

भारत सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य

खरीफ फसलों की खरीद भारत सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाएगी। धान (कॉमन) के लिए 2040 रुपये प्रति क्विंटल, धान (ग्रेड-ए) के लिए 2060 रुपये प्रति क्विंटल, बाजरा के लिए 2350 रुपये प्रति क्विंटल, मक्का के लिए 1962 रुपये प्रति क्विंटल, मूंग के लिए 7755 रुपये प्रति क्विंटल, सूरजमुखी के लिए 6400 रुपये प्रति क्विंटल, मूंगफली के लिए 5850 रुपये प्रति क्विंटल, तिल के लिए 7830 रुपये प्रति क्विंटल, अरहर व उड़द के लिए 6600 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी निर्धारित किया गया है। 

400 से अधिक मण्डियों की व्यवस्था 

राज्य सरकार द्वारा खरीफ फसलों की निर्बाध खरीद सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त संख्या में मण्डियों की व्यवस्था की गई है। धान की खरीद के लिए 201 मंडिंया, बाजरा की खरीद के लिए 86, मक्का की खरीद के लिए 19, मूंग की खरीद के लिए 38 मंडियां, सूरजमूखी की खरीद के लिए 9 मंडियां, मूंगफली की खरीद के लिए 7 मंडियां, तिल की खरीद के लिए 27 मंडियां, अरहर की खरीद के लिए 22 मंडियां तथा उड़द की खरीद के लिए 10 मंडियां निर्धारित की गई हैं। 

मंडियों में अनाज की साफ-सफाई के ‌लिए पर्याप्त संख्या में उपकरण उपलब्धह करवाए गए हैं। इसके अलावा, सभी मंडियों में बारदाने की उपलब्धाता भी सुसनिश्चित की गई है, ताकि फसल की बोली के उपरांत बोरियों में भर उसका उठान भी सुनिश्चित हो सके। 

हेल्प डेस्क से होगा किसानों की समस्या का समाधान 

मंडियों में किसानों की मदद के लिए हेल्प डेस्क की सुविधा स्थापित की गई है। इस हेल्प डेस्क पर मार्केटिंग बोर्ड, कृषि व संबंधित विभाग के अधिकारी तैनात होंगे। हेल्प डेस्क पर किसानों की शिकायतों का भी निवारण किया जाएगा। 

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युवाओं के आर्थिक शोषण को खत्म करने के लिए कौशल रोजगार निगम का गठन किया गया: मुख्यमंत्री मनोहर लाल

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Skill Employment Corporation has been formed to end economic exploitation of youth: Chief Minister Manohar Lal

Page Media: – मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले प्रदेश में अव्यवस्था थी, हमने इसको बदलने का काम किया है। वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल के दौरान एक लाख से ऊपर नियमित सरकारी नौकरी पारदर्शिता एवं योग्यता के आधार पर दी गईं।

न किसी की पर्ची, न किसी की खर्ची चली

इसमें न किसी की पर्ची, न किसी की खर्ची चली है। उन्होंने कहा कि युवाओं के आर्थिक शोषण को खत्म करने के लिए कौशल रोजगार निगम का गठन किया गया। यह आउटसोर्सिंग से जुड़ी सेवाओं में ठेका प्रथा बंद करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

टीजीटी व पीजीटी अध्यापकों को नियुक्ति पत्र

उन्होंने कहा कि अब तक 90 हजार से अधिक कर्मचारियों को इस निगम के माध्यम से समायोजित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों ही इस निगम के माध्यम से एक क्लिक से ही 2075 टीजीटी व पीजीटी अध्यापकों को नियुक्ति पत्र दिए गए है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार 9870 जेबीटी टीचरों को ज्वाइन कराए बगैर उनका भविष्य अधर में छोड़कर चली गई थी। उनमें से 9670 को ज्वाईन करवा दिया गया है।

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केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से हरियाणा को विशेष आर्थिक पैकेज देने की मांग: मुख्यमंत्री मनोहर लाल

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Demand from Union Finance Minister Nirmala Sitharaman to give special economic package to Haryana: Chief Minister Manohar Lal

Page Media: – मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से एनसीआर क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए हरियाणा को विशेष आर्थिक पैकेज देने की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के 14 जिले ऐसे हैं जो एनसीआर क्षेत्र में शामिल हैं।

हरियाणा को विशेष आर्थिक पैकेज

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, पानी, स्वच्छता, शहरी विकास और कनेक्टिविटी के लिए काफी संसाधन खर्च करने पड़ते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए हरियाणा को विशेष आर्थिक पैकेज दिया जाना चाहिए। विभिन्न परियोजनाओं के क्रियान्वन के लिए विशेष पैकेज की मांग बिल्कुल जायज है।

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इंडिया-गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) ने मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ता को दोबारा शुरू करने का निर्णय

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FTA

Page Media: – वाणिज्य और उद्योग, उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के महासचिव महामहिम डॉ. नायफ फलह एम. अल-हजरफ ने आज नई दिल्ली में एक संयुक्त प्रेस वार्ता की, जिसमें इंडिया-जीसीसी एफटीए पर चर्चा करने का इरादा व्यक्त किया गया।

उल्लेखनीय प्रगति पर दोनों देशों ने बातचीत की

आगे की दिशा तय करने और समाधान-आधारित बातचीत के साथ, भारत और जीसीसी देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों के सभी आयामों को मद्देनजर रखते हुये पारस्परिक हितों के समस्त मुद्दों पर होने वाली उल्लेखनीय प्रगति पर दोनों देशों ने बातचीत की।

दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुये कि एफटीए वार्ता को औपचारिक रूप से दोबारा शुरू करने के लिये सभी कानूनी व तकनीकी आवश्यकताओं को जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाये। एफटीए एक आधुनिक और समग्र समझौता है, जिसके दायरे में माल और सेवाओं को रखा गया है।

एफटीए से नये रोजगार पैदा होंगे

दोनों पक्षों ने कहा कि एफटीए से नये रोजगार पैदा होंगे (FTA will create new jobs) , लोगों के रहन-सहन का स्तर बढ़ेगा और इससे भारत तथा सभी जीसीसी देशों में सामाजिक व आर्थिक अवसरों को विस्तार मिलेगा। दोनों पक्षों ने रजामंदी व्यक्त की कि इस समझौते से भारत और जीसीसी के पूरक व्यापारों और आर्थिक इको-सिस्टम के आधार पर निर्मित क्षमता को देखते हुये कारोबार को विस्तार देने तथा उसमें विविधता लाने में सहायता मिलेगी।

जीसीसी इस समय भारत का सबसे बड़ा कारोबारी

उल्लेखनीय है कि जीसीसी इस समय भारत का सबसे बड़ा कारोबारी साझीदार है। वित्तवर्ष 2021-22 में इनके बीच होने वाला द्विपक्षीय व्यापार 154 अरब यूएसडी था, जिसमें निर्यात लगभग 44 अरब यूएसडी और आयात लगभग 110 अरब यूएसडी (33.8 अरब का गैर-तेल निर्यात और 37.2 अरब यूएसडी गैर-तेल आयात) था। भारत और जीसीसी के बीच सेवाओं के द्विपक्षीय कारोबार वित्तवर्ष 2021-22 में लगभग 14 अरब यूएसडी के बराबर रहा, जिसमें निर्यात 5.5 अरब अरब और आयात 8.3 अरब यूएसडी था।

भारत में जीसीसी का निवेश

जीसीसी देश भारत के तेल आयात में लगभग 35 प्रतिशत और गैस आयात में 70 प्रतिशत का योगदान करते हैं। वर्ष 2021-22 में जीसीसी से भारत का कच्चे तेल का आयात लगभग 48 अरब यूएसडी का हुआ, जबकि इसी अवधि में एलएनजी व एलपीजी आयात लगभग 21 अरब यूएसडी का रहा। भारत में जीसीसी का निवेश इस समय 18 अरब यूएसडी से अधिक का है।

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